जटाशंकर -कोई भी आज्ञा दुगुनी कैसे मानी जा सकती है! पूछा- दुगुनी से क्या तात्पर्य है तुम्हारा! जटाशंकर मासुमियत से बोला- मां कहती है- 4/09/2017 09:26:00 pm Read more
जटाशंकर सरकारी अफसर था। था नहीं, पर अपने आपको बहुत ज्यादा बुद्धिमान समझता था। उसके मन मस्तिष्क पर यह सुरूर छाया रहता था कि मुझ से ज्यादा चतुर व्यक्ति इस आँफिस में दूसरा नहीं है। वह पारिवारिक रिश्तेदारी के हिसाब से जल्दी ही प्रगति के पथ पर चढता हुआ अफसर बन गया था। 4/09/2017 09:25:00 pm Read more